बिना कैश बनती कैशलेस इकोनोमी

Notes

प्रधानमन्त्री की विमुद्रीकरण योजना के बाद भारत बहुत भारी कैश की दिक्कत महसूस कर रहा है. जनाक्रोश से बचने के लिए सरकार नई योजना लाई है जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री ने अपनी “मन की बात” में की. प्रधानमन्त्री चाहते हैं कि आधी से ज्यादा अनपढ़ आबादी वाला देश अब तुरंत प्रभाव से कैशलेस हो जाये. अब ये मत कहियेगा कि भारत की लिट्रेसी रेट तो पचास प्रतिशत से ज्यादा है तो मैं भला इसे अनपढ़ आबादी का देश बताने वाला कौन? देखिये भारत की दिक्कत यह है कि हमारे साक्षरता अभियान में हमने लोगों को केवल नाम लिखना सिखाया है. असली पढाई से हम बहुत दूर हैं. कांपते हाथों से नाम लिख पाने वाले नागरिक कैसे कैशलेस ट्रांजेक्शन कर पायेंगे यह देखने वाली बात होगी. बहु आबादी आजभी अपने फोन के मेसेज दूसरों से पढवाती है वहां मोबाइल बेंकिंग कितनी सफल होगी यह सहज ही समझ सकते हैं. ऊपर से समस्या कानून की. आइये समझते हैं ग्राउंड की दिक्कतें:

कैशलेस बनाने में आने वाली गंभीर दिक्कतें:

विश्व के कई देश जिनमें अधिकतर यूरोप के देश शामिल हैं वहाँ कैशलेस इकोनोमी का कांसेप्ट लगातार बढ़ रहा है. लेकिन भारत अभी यूरोप से कोसों दूर है. साफ़ भाषा में मानें तो कम से कम 30 से 40 वर्ष दूर. सबसे गंभीर दिक्कत है साइबर सेक्युरिटी! डिजिटल सर्फेस में सबसे अधिक महत्त्व यूजर की सूचना का होता है; यदि सूचना सुरक्षित है तो ही इसे कैशलेस इकोनोमी में पहला कदम माना जायेगा. इसमें कोई शक नहीं कि सोफ्टवेयर के मामले में भारत का कोई सानी नहीं लेकिन हार्डवेयर के क्षेत्र में भारत कहीं आसपास भी नहीं फटकता. आपको बड़ी हैरानी होगी यह सोच कर कि भारत के अन्दर चलने वाली अधिकतर वेबसाईट, अधिकतर ऐप विदेशों में होस्ट की गयी हैं. आज के दिन में धक्के से पोपुलर बनाई PayTM के सर्वर भी चीन में होस्ट किये गये हैं. बताइये इतनी भारी मात्रा में हुई ट्रांजेक्शन की सेक्योरिटी चीन के सर्वर्स के पास है. चीन विश्व में हार्डवेयर सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है. साइबर स्पेस में हैकर्ज का बड़ा स्पेस होता है. ये गंदे और अच्छे दोनों प्रकार के होते हैं. जहाँ बुरे हैकर किसी भी सिस्टम को हैक कर सूचनाएं चुराने का कार्य करते हैं तो वहीं अच्छे हैकर उस सूचना को सुरक्षित रखने के कदम तैयार करते हैं. अभी कुछ ही दिन पहले आपने देखा होगा कि SBI के 20 लाख से अधिक ATM का डेटा चीन में हैक हो गया था. इसका कारण यह है कि ये ATM भी चीन से बनकर आते हैं और भारत के पास स्वयम का ऐसा कोई रिसर्च नहीं. क्या भारत अपनी वित्तीय सुरक्षा चीन के हाथों में सौंपने को तैयार है? यह है प्रथम प्रश्न! अगली बहुत बड़ी दिक्कत है साइबर कानून का अभाव और कानून के एक्सपर्ट्स का अभाव. भारत के पास केवल एक साइबर कानून है वह है इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट! यह कानून इतने बड़े लेवल पर बचाने के लिए बेहद नाकाफी है. सूचना को सीक्रेट रखने के लिए किसी कम्पनी के लिए बाध्यता ही तय नहीं की गयी है तो उसे शेयर होने से कैसे रोका जायेगा? आपके बैंक खाते को हैक करने के लिए आखिर कितनी सूचना चाहिए हैकर्ज को? आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई निजी कम्पनी यूजर की सूचना शेयर न करे. मोबाइल में ही देख लीजिये. Do Not Disturb Registry कब से चल रही है. न तो फोन ही आने बंद हुए और न मेसेज. इसका कारण है कि कम्पनियां अपने उपभोक्ताओं की डिटेल बेच देती हैं. जब तक ऐसे कार्यों पर रोक नहीं लगेगी कैशलेस कार्य करना बेहद रिस्क भरा है. बड़ी हैरानी होती है कि पूर्ण रूप से विदेश में कार्य कर रही PayTM को प्रधानमन्त्री से लेकर हरियाणा के कृषि मंत्री अनुशंसित करते हुए घुमते हैं. क्या भारत सरकार ने PayTM को कहा है कि वह अपने सर्वर चीन से भारत में शिफ्ट कर ले? इसका उत्तर न में होगा. अगली बड़ी गम्भीर दिक्कत है इन्टरनेट स्पीड का अभाव. जहाँ विश्व 6G तक पंहुच चुका है वहां भारत में 4G भी ढंग से लांच नहीं हुआ. विकसित देशों की 128MBPS की स्पीड के मुकाबले भारत की 1 या 2 MBPS की स्पीड या फिर सुदूर भारत में चल रहे 2G की स्पीड बेहद कम है. इन्टरनेट की स्पीड का कम होना बहुत बड़ा रिस्क है और हैकर्ज को बहुत बढ़िया प्लेटफोर्म उपलब्ध करवाता है और साथ ही ट्रांसेक्शन फेल होने की सम्भावना भी बढती है. ज्यादातर हैकर्ज ट्रांजेक्शन को बीच में हैक करते हैं. हम अभी whatsapp पर नित दिन चल रही झूठी वेबसाइट्स के मेसेज से ही मुक्त नहीं हो पाए हैं और हम बात करते हैं कैशलेस हो जाने की. अगली दिक्कत है ATM की कमी. आपको हैरानी होगी यह सुन कर कि प्रति एक लाख पोपुलेशन भारत में 18 ATM हैं और भारत के ग्रामीण एरिया में कुल ATM का केवल 18%! क्या सच में हम तैयार हैं? मजाक मत कीजिये जनाब लेकिन ये सच्चाई है कि भारत के क्षेत्रफल में केवल 26% में ही इन्टरनेट की सुविधा है! करो भारत को डिजिटल! किसी दिन कोई अपराधी अपराध करने पर आया तो पूरे के पूरे गाँव के पैसे साफ़ कर देगा! आप बैठे रहना हाथ पर हाथ धर कर जैसे नाईजीरियन फ्रौड्स में आप बैठे रहते हैं. आज भी इस फ्रॉड के ईमेल आप तक पंहुचते हैं. इससे तो मुक्ति पाइए आप! चीन जैसे देश जो पाकिस्तान के साथ मिल भारत को नुक्सान पंहुचा रहे हैं वहाँ से आप अपराधियों को वापस भी नहीं ला पाएंगे सजा देना तो दूर! कैशलेस बनाना है तो इन बातों को आपको मानना ही होगा. अब आते हैं साइबर एक्सपर्ट वकीलों की कमी और थानों की कमी पर. साइबर कानून और साइबर वर्ल्ड को समझना आसान नहीं. अत्यंत उन्नत और हररोज बदलती तकनीक के कारण साइबर कानून के जानकारों का अभाव महसूस किया जा रहा है. न तो थानों में ही पुलिस इतनी ट्रेंड है और न ही वकील हैं. वह तो भले वक्तों में मेरे जैसे लोग साइबर कानून पढ़ पाए तो आपको समझा सकते हैं; नहीं तो अधिकाँश वकीलों को साइबर कानून का क-ख-घ नहीं पता. डिजिटल और कैशलेस बनाना अच्छी बात है पर कृपया कर इसकी तैयारी कर लें वरना कैश क्रंच के कारण जो जबरदस्ती आपको कैशलेस की बात शुरू करनी पड़ी और विमुद्रीकरण के फेल होने के बाद अन्य मुद्दों को जन्म देना पड़ा; आगे अगर घोटाले हुए तो जनता आपको माफ़ नहीं कर पाएगी. हरियाणा सरकार ने तो इतना बड़ा जुमला फैंका है कि सरकार 7 दिन में कैशलेस होना चाहती है. इन बातों को लेकर 30 नवम्बर को मैं इण्डिया न्यूज हरियाणा पर डिबेट में शामिल था लेकिन जाने क्या सूझी थी; भाजपा के प्रवक्ता अपनी बात कहने की जगह मेरी बात काटने में व्यस्त रहे.

देखिये नीचे डिबेट का लिंक:

कमेरा साइबर वकील

रविन्द्र