चौधरी देवी लाल जी द्वारा दीन बन्धु सर छोटू राम को अर्पित की गयी विनम्र श्रद्धांजलि

Chaudhary Chhotu Ram

चौधरी देवी लाल जी द्वारा दीन बन्धु सर छोटू राम को अर्पित की गयी विनम्र श्रद्धांजलि दिनांक 12, फरवरी 1978.

हरयाणा वैदिक काल से ही सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक क्रांति के सूत्रधार युगपुरुषों को जन्म देता रहा है. इस ने हर युग में ऐसे महान नर-रत्न पैदा किये, जिन्होंने न सिर्फ इस प्रान्त का सर ऊंचा किया वरन समूचे देश का भी गौरव बढाया.

पिछले सौ साल के अरसे में इस प्रान्त ने जिन नर रत्नों को जन्म दिया, उनमें से दीन बंधू सर चौधरी छोटू राम पहली पंक्ति के जन नेताओं में आते हैं. वह सामाजिक और राजनैतिक क्रांति तथा समाज सुधार के सूत्रधार थे. उन्होंने इस प्रान्त की, खासतौर पर खेतिहर मजदूरों, गरीब किसानों व् कमजोर वर्गों की जो सेवा की है, उस के लिए उनका नाम इतिहास में सदा गर्व से याद किया जाता रहेगा. उन्होंने शोषितों, दलितों और कृषक वर्गों में सदियों से सोये स्वाभिमान को न केवल जगाया वरन अपने अधिकारों की रक्षा हेतू संघर्ष करने के लिए नव-प्राणों का संचार किया.

यद्यपि सर चौधरी छोटू राम बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे और स्वाभिमान एवं निडरता, सादगी तथा सच्चारिता उनकी अपनी ही विशेषताए थीं. लेकिन उन्होंने उस समय के पूरे पंजाब प्रदेश में जो सामाजिक और वैचारिक क्रांति को जन्म दिय, वह अद्भुत थी. उन्होंने मजहबी दीवानापन ख़त्म करके राष्ट्रीय भावों को भरने का काम किया. वे राष्ट्रीय भावनाओं की प्रतिमूर्ति थे. सांप्रदायिक भावनाओं को खत्म करने के लिए वह पूरी हिम्मत, पूरे जोश से संघर्षरत रहे. उनके राष्ट्रीय विचारों को समझने के लिए उनके उस कथन को ध्यान में रखना होगा, जो वह अपने राजनैतिक विरोधियों को अक्सर कहा करते थे. उनका कहना था कि “जहाँ तक अपने देश का सवाल है, वहां मैं पक्का भारतीय हूँ और जहाँ सवाल खेतिहर और गैर खेतिहर का है, वहन मैं एक खेतिहर हूँ और पार्टी के अंदर मैं उनके अधिक निकट हूँ जो पार्टी के प्रति वफादार हैं.”

सर चौधरी छोटू राम पहले ऐसे व्यक्ति थे. जिन्होंने मंत्रीमंडल में दायित्वपूर्ण पदों पर अपने जिम्मेदारियों को निभाते हुए किसानों के हितों को कभी भी आँखों से ओझल नहीं होने दिया. तत्कालीन पंजाब की सरसब्ज बनाने का जो काम चौधरी साहब के वक्त हुआ, वह बेमिसाल है. उन्होंने सिंचाई साधनों और भूमि-कानूनों के सुधर पर खासतौर पर बल दिया. चौधरी साहब ने उसी समय यह समझ लिया था कि सिंचाई सहूलतों को बढाये बिना कृषि पैदावार में बढ़ोतरी तथा किसानों की आर्थिक प्रगति सिर्फ कोरी कल्पना को ही जाता है. छोटे किसानों से लगान न लिया जाये, इसके लिए उन्होंने सैद्धांतिक लड़ाई लड़ी. उन्होंने पांच बीघा जमीन के मालिकों को भूमि करों से मुक्त रखने पर जोर दिया. साहूकारों के चंगुल से गरीब वर्गों उर किसानों को छुड़ाने के लिए उन्होंने एक शासक के तौर पर, एक वकील के तौर पर, एक न्याय-समर्थक महान पुरुष के तौर पर संघर्ष किया. सर चौधरी छोटू राम आदमी से ज्यादा सिद्धांत को प्यार करते थे और देश में गरीबी, बिमारी, अनपढ़ता तथा भ्रष्टाचार जैसे मसलों के प्रति वह एक जागरूक राजनीतिज्ञ की भाँति न सिर्फ सचेत थे वरन उनके समाधान के लिए भी सदैव प्रयत्नशील रहे.

जब हम उनके आर्थिक सिद्धांतों के विषय में विचार करते हैं तो हमें यह याद रखना होगा कि सर छोटू राम का उद्देश्य समाज की समूचे तौर पर हालत सुधारना और देहात की गिरी हुई आर्थिक स्थिति की समस्या को जड़ से पकड़ना था. वह इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि भारत की असली आत्मा तो गाँवों में बसती है. लेकिन फिर भी जो किसान सारे देश को भोजन देता है वह खुद भूखा-नंगा रहता है. इसलिए उन्होंने देहाती काश्तकारों की गरीबी उन्मूलन के लिए अपनी साड़ी ताकत लगा दी. उन्होंने राजस्व वसूली के क्रन्तिकारी कदम उठाये और अर्थ-व्यवस्था को संतुलित रूप प्रदान करने के प्रयत्न किये.

सर चौधरी छोटू राम ने खेती के साथ साथ देहाती व घरेलू उद्योगों के विकास पर भी बल दिया. उनका विश्वास था कि कृषि-उत्पादन को बढ़ाने के साथ साथ औद्योगिक उत्पादन तथा छोटे और घरेलू उद्योगों की स्थापना से ही सर्वतोमुखी समृद्धि का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है.

सभी सामाजिक एवं राजनीतिक बुराइयों की जद रिश्वतखोरी है, इस बात को सर चौधरी छोटू राम ने अच्छी तरह जान लिया था. वे भ्रष्ट और बेईमान सरकारी कर्मचारियों के सख्त विरोधी थे. उन्होंने अपने लेखों और भाषणों से रिश्वतखोरी पर तीखे प्रहार किये. उन्होंने सारे अधिकारीयों को जनता के प्रतिनिधियों से बेरोकटोक मिलने के लिए अपने दरवाजे खुले रखने का परामर्श दिया.

सर चौधरी छोटू राम का जीवन इतना विराट है, उसके सिद्धांत और कार्य इतने व्यापक हैं कि उनपर किसी भी संक्षिप्त लेख में प्रकाश डालना कठिन ही नहीं वरन असंभव है. वे एक युगपुरुष थे और उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि वह जिस सिद्धांतों की रक्षा के लिए जिये और अमरता को प्राप्त हुए, उन्हें नई पीढ़ी श्रद्धा से अपनाए और भ्रष्टाचार व् रिश्वतखोरी की लानत को सदा के लिए खत्म करने का व्रत ले.

हरयाणा में जनता सरकार का नेतृत्व सम्भालते ही जो व्रत ,मैंने लिया है उसमें भ्रष्टाचार की समाप्ति के कार्यक्रम को सबसे ऊपर रखा गया है. हमारा लक्ष्य ही यही है “भ्रष्टाचार बंद, पानी का प्रबंध”. इस दिशा में पिछले सात-आठ मासों में जनता सरकार की दो महान उपलब्धियां हैं, वह किसी से भी छिपी नहीं हैं. भ्रष्टाचार खत्म करने, रिश्वतखोरी दूर करने, किसानों की दशा को सुधारने और देहातों के काया कल्प के कदमों से माने हम राष्ट्रपिता और हरयाणा के महान सपूत चौधरी साहब के सपनों को मूर्त रूप दे रहे हैं . यह सरकार ग्राम विकास पर सबसे ज्यादा जोर दे रही है और देहातों के उत्थान तथा किसानों की आर्थिक दशा को ऊँचा उठाने की योजनाओं पर सबसे ज्यादा खर्च किया जा रहा है. इन योजनाओं को तेजी से अम्ल में लाने से विकास रथ को जो नई गति मिली है उससे वह दिन दूर नहीं जब हरयाणा का हर किसान और प्रान्त का हर देहात देश के विकसित और प्रगतिशील देहात की पहली पंक्ति में आ खड़ा होगा.

हमने लोकतान्त्रिक मूल्यों की स्थापना और सामाजिक तथा आर्थिक उत्थान का व्रत लिया है, जिसके लिए सर्वांगीण विकास के लक्ष्य को अपनाया गया है.

सरकार इस बात के लिए दृढ प्रतिग्य है कि जनता के सामूहिक कल्याण और प्रान्त की तरक्की के जो वायदे किये गये हैं, उन्हें तत्परता से पूरा किया जाये. मैं इस अवसर पर सर चौधरी छोटू राम को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ और जनता को प्रान्त के विकास के हर कार्यक्रम में शरीक होने का आव्हान करता हूँ ताकि प्रान्त की ख़ुशी और खुशहाली के सपनों को तेजी से साकार किया जा सके.