भारत की वेटलैंड यानी दलदल

Wetlands India

आज दिन में एक खबर आई कि हरयाणा के मुख्यमंत्री भिंडावास को एशिया की सबसे बड़ी लेक बता रहे हैं और कह रहे हैं कि उसे रखरखाव और देखभाल की आवश्यकता है. मुख्यमंत्री के ऐसे कहने से मुझे बहुत हैरानी हुई क्योंकि न तो भिंडावास झील है और कम से कम एशिया की सबसे बड़ी तो बिल्कुल भी नहीं. अतः एक लेख लिख रहा हूँ कि आम जनता को समझ आये कि आखिर यह है क्या? आम तौर पर हम सब कन्फ्यूज कर देते हैं जब हम ऐसे पानी को देख उसे झील समझ लेते हैं. भिंडावास पक्षी विहार झील न होकर आद्र्भूमि यानि Wetland है. भिंडावास को समझने से पहले हम वेटलैंड को समझ लें कि वह क्या है?

वेटलैंड क्या है?

भारत सरकार ने 2010 में Wetland (Conservation and Management Rules), 2010 को नोटिफाई किया था. उसके अनुसार वेटलैंड की डेफिनिशन निम्न है:

“Wetland” means an area or of marsh, fen, peat land or water; natural or artificial permanent or temporary, with water that is static or flowing, fresh, brackish or salt, including areas of marine water, the depth of which at low tide does not exceed six metres and includes all inland waters such as lakes, reservoir, tanks, backwaters, lagoon, creeks, estuaries and manmade wetland and the zone of direct influence on wetlands that is to say the drainage area or catchment region of the wetlands as determined by the authority but does not include main river channels, paddy fields and the coastal wetland covered under the notification of the Government of India in the Ministry of Environment and Forest, S.O. Number 114(E), dated the 19th February, 1991 published in the Gazette of India, Extraordinary, Part II, Section 3. sub-section (if) of dated the 20th February, 1991;

वेटलैंड्स जटिल पारिस्थितिकी प्रणालियां हैं, जिनमें अंतर्देशीय, तटीय और समुद्रीय प्राकृतिकवास की व्यापक श्रृंखला शामिल हैं। इनमें नम और शुष्क दोनों वातावरण की विशेषताएं पाई जाती हैं और ये अपनी उत्पत्ति, भौगोलिक स्थिति, जल वैज्ञानिक व्यवस्थाओं और अध:स्तर के आधार पर व्यापक विविधता दर्शाती हैं। इनमें बाढ़ वाले मैदान, दलदल, मछली के तालाब, ज्वार की दलदल और मानव निर्मित आर्द्रभूमि शामिल हैं। सर्वाधिक उत्पादक जीवन सहायता में आर्द्रभूमि का मानवता के लिए सामाजिक-आर्थिक एवं पारिस्थितिकी महत्व है। ये प्राकृतिक जैव विविधता के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। ये पक्षियों और जानवरों की विलुप्तप्राय: और दुर्लभ प्रजातियों, देशज पौधों और कीड़ों को उपयुक्त आवास उपलब्ध कराती हैं। भारत विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में मौजूद वैटलैंड्स पारिस्थितिकी सम्पदा वाला देश है। भारत के अधिकांश वेटलैंड्स गंगा, कावेरी, कृष्णा, गोदावरी और ताप्ती जैसी प्रमुख नदी प्रणालियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। एशियन वेटलैंड्स कोष (1989) के अनुसार वेटलैंड्स का देश के क्षेत्रफल (नदियों को छोड़कर) में 18.4 प्रतिशत हिस्सा है, जिसके 70 प्रतिशत भाग में धान की खेती होती है। भारत में वेटलैंड्स का अनुमानित क्षेत्रफल 4.1 मिलियन हेक्टेयर (सिंचित कृषि भूमि, नदियों और धाराओं को छोड़कर) है, जिसमें से 1.5 मिलियन हेक्टेयर प्राकृतिक और 2.6 मिलियन हेक्टेयर मानव निर्मित है। तटीय वेटलैंड्स का अनुमानित क्षेत्रफल 6750 वर्ग किलोमीटर है और इनमें मुख्यत: मैनग्रोव वनस्पति की बहुतायत है[i]। बाढ़ नियंत्रण में भी इनकी भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। आर्द्रभूमि तलछट का काम करती है जिससे बाढ़ जैसी विपदा में कमी आती है। आर्द्रभूमि पानी को सहेजे रखती है बाढ़ के दौरान आर्द्रभूमियाँ पानी का स्तर कम बनाए रखने में सहायक होती हैं। इसके अलावा आर्द्रभूमि पानी में मौजूद तलछट और पोषक तत्वों को अपने में समा लेती है और सीधे नदी में जाने से रोकती है।

इस प्रकार झील, तालाब या नदी के पानी की गुणवत्ता बनी रहती है। समुद्री तटरेखा को स्थिर बनाए रखने में भी आर्द्रभूमियाँ का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। ये समुद्र द्वारा होने वाले कटाव से तटबन्ध की रक्षा करती हैं। आर्द्रभूमियाँ समुद्री तूफान और आँधी के प्रभाव को सहन करने की क्षमता रखती हैं। आर्द्रभूमियाँ पानी के संरक्षण का एक प्रमुख स्रोत है।

वेटलैंड ग्राउंड वाटर रिचार्ज, पक्षियों के रहने के लिए, अत्यंत दुर्लभ जीव जन्तु एवं पेड़ पौधों के रहने के लिए एक बेहद महत्त्वपूर्ण संसाधन है. वर्तमान में भारत की बहुत सी आर्द्रभूमियों पर संकट के बादल मँडरा रहे हैं। आर्द्रभूमियाँ प्रदूषण के कारण संकट में हैं। तेजी से बढ़ते कंक्रीट के जंगल, उद्योग, शहरीकरण के लिये जलग्रहण क्षेत्र से छेड़खानी, हजारों टन रेत का जमाव और कृषि रसायनों के जहरीले पानी का आ मिलना आर्द्रभूमियों की बर्बादी का कारण है।

भारत में ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं जहाँ आर्द्रभूमियों की बर्बादी के साथ ही जंगली जानवरों या पौधों पर संकट मँडरा रहा है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल के दलदली क्षेत्र में ‘दलदली हिरण’ पाया जाता है। यह हिरण भी कम हो रहा है।

इस प्रजाति के हिरणों की संख्या लगभग एक हजार बची है। इसी प्रकार तराई वाले क्षेत्रों में पाई जाने वाली फिशिंग कैट यानी मच्छीमार बिल्ली पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही गुजरात के कच्छ क्षेत्र में जंगली गधा भी खतरे में है।

असम के काजीरंगा और मानव दलदलीय क्षेत्रों से जुड़ा एक सींग वाला भारतीय गैंड़ा भी प्रायः विलुप्त प्राणियों की श्रेणी में शामिल है। इसी प्रकार ओटर, गैंजेटिक डाॅल्फिन, डूरोंग, एशियाई जलीय भैंस जैसे आर्द्रभूमियों से जुड़े अनेक जीव खतरे में हैं।

रेंगने वाले जीव जैसे समुद्री कछुआ, घड़ियाल, मगरमच्छ, जैतूनी रिडली और जलीय माॅनीटर पर भी आर्द्रभूमियों के प्रदूषित होने के कारण संकट मँडरा रहा है। जीवों के अतिरिक्त कुछ वनस्पतियाँ भी आर्द्रभूमि के संकट से प्रभावित हो रही हैं।[ii]

वेटलैंड झील से किस प्रकार अलग है?

डेफिनिशन के अनुसार वेटलैंड यानि दलदल/आद्र्भूमि पानी का वह जमाव है जहाँ पानी का स्तर 6 मीटर अथवा उससे कम होता है. जबकि झील के मामले में यह स्तर कहीं गहरा होता है. यही कारण है कि वेटलैंड पक्षियों के रहने के लिए विहार बन जाती हैं जबकि झीलों के कैचमेंट एरिया अथवा किनारों को छोड़ अक्सर ऐसा नहीं होता. दलदल पक्षियों के रहने के लिए आहार उपलब्ध कराती है जो कि आमतौर पर झील नहीं करा पाती.

वेटलैंड्स पर रामसर सम्मेलन

भारत ने वेटलैंड्स और जैव-विविधता सम्मेलनों पर हस्ताक्षर किए हैं। रामसर, ईरान में 1971 में हस्ताक्षरित वेटलैंड्स सम्मेलन अंतर-सरकारी संधि है, जो वेटलैंड्स और उनके संसाधनों के संरक्षण और बुद्धिमतापूर्ण उपयोग के लिए राष्ट्रीय कार्य और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का ढांचा उपलब्ध कराती है। वर्तमान में इस सम्मेलन में 158 करार करने वाले दल हैं और 1758 वेटलैंड्स स्थल हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 161 मिलियन हेक्टेयर है, जिन्हें अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वेटलैंड्स की रामसर सूची में शामिल किया गया है। रामसर सम्मेलन विशेष पारिस्थितिकी तंत्र के साथ काम करने वाली पहली वैश्विक पर्यावरण संधि है। रामसर वेटलैंड्स सम्मेलन को विलुप्त हो रहे वेटलैंड्स प्राकृतिक आवासों पर अंतर्राष्ट्रीय ध्यान दिए जाने का आह्वान करने के उद्देश्य से विकसित किया गया था। क्योंकि इन वेटलैंड्स के महत्वपूर्ण कार्यों, मूल्यों, वस्तुओं और सेवाओं के बारे में समझ का अभाव देखा गया है। इस सम्मेलन में शामिल होने वाली सरकारें वेटलैंड्स को पहुंची हानि और उनके स्तर में आई गिरावट को दूर करने के लिए सहायता प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। इसके अलावा अनेक वेटलैंड्स अंतर्राष्ट्रीय प्रणालियां हैं, जो दो या अधिक देशों की सीमाओं पर स्थित हैं या एक से अधिक देशों की नदियों की घाटियों का हिस्सा हैं। इन वेटलैंड्स की स्थिति नदियों, धाराओं, झीलों या भूमिगत जल भंडारों से प्राप्त होने वाले पानी की गुणवत्ता और मात्रा पर निर्भर करती है। आपसी हितों के लिए अंतर्राष्ट्रीय विचार-विमर्श और सहयोग के ढांचे की जरूरत है। रामसर सम्मेलन की मुख्य विशेषताओं में जैव-विविधता और मानवीय प्रभाव की निगरानी करना वेटलैंड्स के संरक्षण के लिए कानून बनाने में सुधार, प्राकृतिक प्रबंधन में जैव-विविधता संरक्षण के लिए आर्थिक तंत्र का विस्तार, कमचटका क्षेत्र में नये संरक्षित क्षेत्रों (रामसर स्थलों) का संगठन, स्थानीय जनता के साथ कार्य करना और धन के श्रोतों की खोज करने जैसी सिफारिशें शामिल हैं[iii]

भारत में बहुत सी रामसर साईट हैं; जिनमें हमारे आस पास पंजाब की हरिके (4100 हेक्टेयर), कंजलि (183 हेक्टेयर) एवं रोपड़ (1365 हेक्टेयर) प्रमुख हैं. हरयाणा में एक भी रामसर साईट नहीं है जिसका प्रमुख कारण यह है कि हरयाणा में प्राकृतिक नदी का कोई स्रोत नहीं है; ऐसे में प्राकृतिक पानी की काफी कमी से हमें जूझना पड़ता है. लेकिन फिर भी हरयाणा में अपनी वेटलैंड हैं जिनका नाम है भिंडावास (432 हेक्टेयर) और सुल्तानपुर (145 हेक्टेयर). हमारे चण्डीगढ़ में सुखना लेक में भी वेटलैंड का क्षेत्र है. निम्न सारणी में आप देख सकते हैं कि कौनसी आद्र्भूमियां रामसर कन्वेंशन के दायरे में आती हैं:

भारत में रामसर संरक्षित आर्द्रभूमियों की सूची
क्रं. आर्द्रभूमि अधिसूचित राज्य क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)
1 अष्टमुडी आर्द्रभूमि 19.08.2002 केरल 61,400
2 भितरकनिका मैंग्रोव आर्द्रभूमि 19.08.2002 उड़ीसा 65,000
3 भोज ताल 19.08.2002 मध्य प्रदेश 3,201
4 चन्द्रताल आर्द्रभूमि 08.11.2005 हिमाचल प्रदेश 49
5 चिल्का 01.10.1981 उड़ीसा 1,16.500
6 डिपोल बिल 19.08.2002 असम 4,000
7 पूर्वी कोलकाता आर्द्रभूमि 19.08.2002 पश्चिम बंगाल 12,500
8 हरिका झील 23.03.1990 पंजाब 4,100
9 होकेरा आर्द्रभूमि 08.11.2005 जम्मू एवं कश्मीर 1,375
10 कंजिली 22.01.2002 पंजाब 183
11 केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान 01.10.1981 राजस्थान 2,873
12 कौलुरू झील 19.08.2002 आंध्र प्रदेश 90,100
13 लोकटक झील 23.03.1990 मणिपुर 26,600
14 नलसरोवर पक्षी अभयारण्य 24.09.2012 गुजरात 12,000
15 पाइंट कैलिमर वन्यजीव अभयारण्य एवं पक्षी विहार 19.08.2002 तमिलनाडु 38,500
16 पोंग बाँध झील 19.08.2002 हिमाचल प्रदेश 15,662
17 रेणुका आर्द्रभूमि 08.11.2002 हिमाचल प्रदेश 20
18 रोपर 22.01.2002 पंजाब 1,365
19 रुद्रसागर झील 08.11.2002 त्रिपुरा 240
20 सांभर झील 23.03.1990 राजस्थान 24,000
21 साथामुकोटा झील 19.08.2002 केरल 373
22 सुरिनसर-मान्सर झील 08.11.2005 जम्मू एवं कश्मीर 350
23 सौमित्री 19.08.2002 जम्मू एवं कश्मीर 12,000
24 ऊपरी गंगा नदी 08.11.2005 उत्तर प्रदेश 26,590
25 बेमनाड-कोल आर्द्रभूमि 19.08.2002 केरल 1,51,250
26 वुलर झील 23.03.1990 जम्मू एवं कश्मीर 18,900

दलदल को खत्म करने में सबसे ज्यादा खतरनाक इण्डस्ट्रियल वाटर, वीड, एनक्रोचमेंट जैसे कारक हैं. चूंकि भारत रामसर कन्वेंशन को साइन करने वाले देशों में है इसलिए बहुत देरी से यानी 2010 में जाकर कहीं वेटलैंड को प्रोटेक्ट करने के लिए रूल बनाये गये. इन रूल्स में से सबसे महत्त्वपूर्ण यह है कि नोटिफिकेशन के 2 वर्ष के अंदर अंदर सरकार की जिम्मेदारी होगी कि भारत के सभी वेटलैंड को साफ़ कर दे, एनक्रोचमेंट खत्म कर दे. जब यह खत्म नहीं हुआ तो 2012 में मैं पंजाब एवं हरयाणा उच्च न्यायालय पंहुचा; जहाँ हरयाणा, पंजाब और चंडीगढ़ तीनों ने आकर कहा कि कानून का पालन होगा और दो वर्ष के अंतराल में यह सब साफ़ कर दिया जायेगा. आज झज्जर से आई खबर के अनुसार भिंडावास में आज भी वीड, सिल्ट आदि मौजूद है. एक वृहद मामला इस समय भी कोर्ट में चल रहा है जहाँ सुप्रीमकोर्ट सरकारों से वेटलैंड को साफ़ करवाने के बारे में रिपोर्ट ले रही है. हर वर्ष दो फरवरी को विश्व आद्र्भूमि दिवस के रूप में मनाया जाता है. इसे वाइल्ड लाइफ सेंचुरी से कन्फ्यूज न करें क्योंकि वे जंगली क्षेत्र हैं जो कि वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के अनुसार नामित होते हैं और न ही इन्हें झील समझें. इन्हें बचाएं क्योंकि इनमें ही हमारे बच्चों का जीवन है. अब यदि प्रदेश का मुख्यमंत्री आद्र्भूमि के बारे में नही जानता तो कोई और क्या जानेगा. यदि मैं गलती से राजनीति में ना आता तो शायद मैं अपना जीवन इन आद्र्भूमियो को बचाने में लगा देता.

[i] http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=27298

[ii] http://hindi.indiawaterportal.org/node/51097

[iii] http://pib.nic.in/newsite/hindifeature.aspx?relid=27298