किस्मत महरबान तो गधा पहलवान

Khattar

अनपढ़ सरकार के अनपढ़ पुरौधा

एक हिंदी की कहावत है कि गर बन्दर के हाथ में उस्तरा पकड़ा दो तो वो न जाने क्या क्या काट देता है. ये कहावत हरयाणा की भाजपा सरकार पर पूर्णतया लागू होती है. ऐसा नहीं है कि मुझे यह कहने का मौका पहली बार मिला है; मैंने ये पहले भी कहा है; बार बार कहा है कि सरकार अनपढ़ है. खैर, इस बार मुद्दा कुछ ऐसा है कि सरकार और उसके पुरौधाओं की मूर्खता एक नये आयाम से स्थापित हुई है.

बात ऐसी है कि इनेलो के युवा सांसद भाई दुष्यंत सिंह चौटाला ने भारत के प्रधानमन्त्री को एक बहुत गंभीर विषय पर चिट्ठी लिखी. भारत में 1 जुलाई 2017 से GST लागू हो रहा है. इस GST को लागू करवाना भाजपा अपने लिए सबसे बड़ी उप्लब्धि मानती है; इस GST को सालों साल तक संसद में रोक कर रखने वाली खुद भाजपा थी. खैर, GST पास हुआ. इसे पास कराने में विपक्ष की सभी पार्टियों ने देशहित में सहयोग किया. इनेलो भी उसमें शामिल थी, पास हुआ और अब लागू होने में कुछ ही दिन बाकी है. नया मुद्दा अब यह आया कि GST के रेट बहुत अधिक रखे गये हैं. इसका मैक्सिमम स्लैब 28% रखा गया है जबकि आमतौर पर विश्व में यह 20% से नीचे रखा जाता है. विपक्ष के रूप में हमने GST लागू करने में सैद्धांतिक सहमति जताई थी; इसके रेट अथवा लागू करने की पद्धति को लेकर नहीं. GST के रेट लागू करने के लिए GST काउन्सिल बनाई गयी. काउन्सिल ने पहली ही मीटिंग में किसान विरोधी फैंसला लिया. कृषि उपकरण जिन पर पहले कोई टैक्स नहीं लगता था वे 12% के दायरे में आ गये, ट्रैक्टर के स्पेयर पार्ट्स को 28% स्लैब में रख दिया गया. इसके अलावा फर्टिलाइजर के ऊपर 12% टैक्स लगा दिया गया; यह टैक्स पहले 8% अथवा कम था. ऐसे में इनेलो सांसद दुष्यंत सिंह चौटाला ने स्थिति की गम्भीरता को देखते हुए बेहद सधे हुए शब्दों में प्रधानमंत्री जी से चिट्ठी लिख आग्रह किया कि ट्रैक्टर पार्ट्स पर 28% GST लगाने से कम से कम 25000 से 30000 कीमत बढने की आशंका है; ऐसे में इसे GST फ्री किया जाये. मामला संगीन था; आवश्यक मुद्दा पहली बार किसी सांसद ने उठाया था. लेकिन अनपढ़ सरकार के अनपढ़ पुरोधाओं को वह जमा नहीं. केवल राजनैतिक आरोप लगा वाहवाही लूटने के लिए किस प्रकार मूर्खता दिखाई गयी यह आपको मैं भाजपा प्रवक्ता श्री जवाहर यादव के प्रैस नोट और प्रैस नोट की हर लाइन के साथ लिखी मेरी कमेन्ट से बताता हूँ. इतना डिटेल में आर्टिकल लिखने की आवश्यकता इसलिए पढ़ी क्योंकि इस मूर्खता को बढ़ावा दे न केवल मीडिया में आगे ले जाया जा रहा है; अपितु सोशल मीडिया पर भी फैलाया जा रहा है.

आइये पढ़ते हैं वह प्रैस नोट और उसमें बिखरी हुई मूर्खता:

जीएसटी को ध्यान से समझें सांसद दुष्यंत चौटाला, किसानों के लिए कुछ महंगा नहीं होगा – जवाहर यादव

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इनेलो के युवा सांसद दुष्यंत चौटाला ने मांग की है कि जीएसटी के तहत ट्रैक्टर के पुर्जों पर लगने वाले टैक्स को कम किया जाए।

इस मांग को कैसे नाजायज समझा यह प्रवक्ता जी बताना भूल गये.

लेकिन जीएसटी को लेकर उनकी समझ कितनी है और उन्होंने इस नई प्रणाली के बारे में कितना पढ़ा है, यह इस बात से पता चलता है कि उन्हें जीएसटी की फुल फॉर्म भी नहीं पता। दुष्यंत ने प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में GST को General Sales Tax लिखा है जबकि देश का बच्चा-बच्चा जानता है कि GST मतलब Goods & Services Tax. ऐसे समय में जब हर रोज देश में जीएसटी पर चर्चा हो रही है और खबरें आ रही हैं, एक सांसद का इसके पूरे नाम से भी अनजान होना बहुत चिंतित करने वाला है।

-यह है जनाब मूर्खता का सबसे बड़ा आयाम. श्री यादव पढ़े लिखे हैं और मेरे मित्र भी हैं. बड़े तेज तरार प्रवक्ता हैं; न जाने किन कारणों से OSD पद से हटा दिए गये. खैर, यह मुद्दा नहीं है. मुद्दा यह है कि GST की फुल फॉर्म क्या है? किसी आम अर्थशास्त्र के ज्ञाता को भी यह पता है कि GST का असली फुल फॉर्म General Sales Tax है और यही फॉर्म समूचे विश्व में सैंकड़ों देशों में इस्तेमाल होती है जिनमें से एक अमेरिका भी शामिल है जहाँ दुष्यंत जी पढ़े हैं लेकिन जहाँ जाने से वर्तमान प्रधानमंत्री को 2014 तक किसलिए रोका गया था वह सारा भारत जानता है. फिर भी भारत और स्वयम की इज्जत की धज्जियां उड़ाते हुए श्रीमान जी बार बार अमेरिका जाते रहते हैं. खैर, सेंट्रल अमेरिका GST को क्या फुल फॉर्म देता है यहाँ पढिये. चलो अमेरिका के लोग मूर्ख हैं तो एक वैश्विक संस्था The Organization for Economic Cooperation and Development (OECD) इसका क्या अर्थ बताती है वह यहाँ पढिये. चलिए छोडिये भारत के सबसे प्रतिष्टित अख़बारों में से एक टेलेग्राफ़ अपने लेख में इसे क्या कहता है यहाँ पढिये. खैर, आगे बढ़ते हैं, चलिए दोनों की डेफिनिशन को समझते हैं;

CBEC के अनुसार यह एक सिंगल टैक्स है जो एक ही स्टेज पर लगाया जाता है. यही General Sales Tax की भी डेफिनिशन है. खैर, बहुत हुआ अर्थशास्त्र का ज्ञान अब जरा आगे बढ़ते हैं प्रेस नोट में.

श्री जवाहर आगे लिखते हैं:

क्या इनेलो इसी तरह बिना सोचे समझे मुद्दे उठाती है ? जब नाम ही ठीक से नहीं पता तो कैसे मानें कि सांसद ने कृषि या ट्रैक्टर उद्योग पर जीएसटी के असर को समझने के लिए वक्त लगाया होगा। बिना सोचे समझे चिट्ठी लिखकर ही किसान नेता कहलवाने से उन्हें इस युवा उम्र में बचना चाहिए और खुद जागरूक होकर जीएसटी को पढ़ना व समझना चाहिए। साथ ही किसानों को भी भड़काने की बजाए जागरुक करना चाहिए।

लो जनाब, ज्ञान टपक गया है सरकार जी का. GST की लिटरेरी डेफिनिशन और लिटरेरी फुल फॉर्म को पढने या पढाने से पहले माननीय को पता होना चाहिए था कि GST लगाने वाला भारत पहला देश नहीं है. किसान नेता कौन कहलवाने की कोशिश कर रहा है और कौन बिना पढ़े आया वह आगे उनके प्रेस नोट के अंदर पढ़ें:

सांसद दुष्यंत चौटाला, इनेलो और विपक्ष के सभी नेताओं को जीएसटी के बारे में विस्तार से इसलिए भी पढ़ना चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि यह देश में कितना हित में है। जहां तक किसानों और खेती उपकरणों की बात है, यह भाजपा सरकार की प्रतिबद्धता है कि खेती में इस्तेमाल होने वाला कोई भी उपकरण, खाद-बीज आदि पहले से महंगा नहीं होगा। पहले किसी उपकरण पर कई तरह के टैक्स लगते थे और कुल मिलाकर कीमत काफी बढ़ जाती है लेकिन अब एक ही टैक्स लगेगा जो दिखने में ज्यादा नज़र आ सकता है लेकिन कीमत पर पुराने टैक्सों से कम ही असर डालेगा। कृषि, बागवानी, पशुपालन, लघु उद्योग आदि क्षेत्रों में जीएसटी से किसी उपकरण या कच्चे सामान की कीमत ना बढ़े, यह भाजपा सरकार का पक्का निश्चय है। 28 प्रतिशत टैक्स ऑटो सेक्टर के पुर्जों पर प्रस्तावित है और ट्रैक्टर व अन्य कृषि उपकरणों को इस सेक्टर से अलग मानने का फैसला जीएसटी काउंसिल पिछले रविवार को ही कर चुकी है।

बिना पढ़े कुछ भी लिखने या बोलने से, अथवा कुछ समझ न पाने से ऐसा ही होता है. GST Council की 18.05.2017 एवं 03.06.2017 की मीटिंग में ट्रेक्टर के कलपुर्जे 28% स्लैब में रखे गये; जिसका बाद में पुरजोर विरोध हुआ और उसके बाद 11.06.2017 (रविवार) की मीटिंग में इस मुद्दे को उठाया गया तो केवल 5% उपकरण जिनमें ट्रैक्टर के टायर, फ्रंट एक्सेल शामिल थे उन्हें 28% से घटा कर 18% स्लैब में रख दिया गया. इसके अलावा अन्य उपकरणों पर अभी तक चर्चा नहीं हुई और वह चर्चा 18 जून को होनी प्रस्तावित थी, जिसकी खबर अभी तक नहीं आई है. 11.06.2017 की मीटिंग में घटाया GST रेट इस लिंक में देखिये. ट्रैक्टर का जिक्र केवल पॉइंट 41, 42 में है जहाँ दो तीन कलपुर्जे लिखे गये हैं, इसके अलावा कौनसे कलपुर्जे अन्य ऑटो सेक्टर से अलग किये गये यह श्रीमान जी बता दें.

सांसद दुष्यंत चौटाला ने चिट्ठी इससे एक दिन पहले लिखी थी। हालांकि इस बारे में जीएसटी काउंसिल ने फैसला कई सदस्यों के अनुरोध पर किया है, लेकिन दुष्यंत चौटाला भी इसके लिए केंद्रीय वित्तमंत्री को धन्यवाद कर सकते हैं।

ओह्ह यहाँ आखिर कार मोहतरम ने बताया कि वे तो 18.06.2017 की मीटिंग की बात कर रहे हैं. चलिए भाई 18 जून का लिंक भी देख लेते हैं उस दिन हुआ क्या है. 18 जून की कार्यवाही यहाँ पढ़ें. मोहतरम जब आप जान और मान चुके हैं कि दुष्यंत जी ने चिट्ठी 17 जून यानी कौंसिल की मीटिंग से एक दिन पहले लिखी थी तो क्या आप यह भी मानते हैं कि हमारे पास कोई ऐसी अदृश्य शक्ति है जो हमे आपके निर्णय के बारे में एक ही दिन पहले बता देगी. मोहतरम यहाँ मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं; वे यह बुद्धिमानी दिखाने की कोशिश में हैं कि दुष्यंत जी को मीटिंग की कार्यवाही के बारे में कुछ नहीं पता. जबकि अब यहाँ खुद मान रहे कि चिट्ठी तो एक दिन पहले लिखी गयी थी. मुद्दा तो हुआ ना श्रीमान जी. और किस बात का धन्यवाद, आपका कार्य है देश की जनता के लिए कार्य करना; हम खैरात नहीं मांग रहे. किसानों के लिए जायज हक मांग रहे हैं. इससे पहले ट्रैक्टर पर कुल 12.5 फीसदी केन्द्रीय एक्साइज के अलावा राज्यों का वैट लग रहा है जो आम तौर पर 6 से 8% की श्रेणी में है. ऐसे में सीधे 18.5% से 28% के स्लैब में जाने के बाद किस प्रकार ट्रैक्टर महंगा नहीं होगा वह और बता देते तो आपका भला होता. इकोनिमिक्स टाइम्स मुझसे या आपसे अधिक बुद्धिमान है इस मामले में पढना वह क्या कह रहा है.

देश में टैक्स प्रक्रिया को लेकर आजादी के बाद का सबसे बड़ा सुधार देश की लोकप्रिय भाजपा सरकार लेकर आ रही है। जीएसटी के लागू हो जाने से कर प्रक्रिया बहुत आसान हो जाएगी और कर चोरी पर रोक लगेगी। जीएसटी के आ जाने से कोई भी उत्पाद या सेवा महंगी नहीं होगी बल्कि उत्पादक और सेवा क्षेत्र की कंपनियां अलग-अलग टैक्सों के झंझट से बचेंगे और एक ही टैक्स भरकर अपना काम पहले से आसानी से करेंगे। कर चोरी करना बहुत मुश्किल हो जाएगा जिससे देश का राजस्व बढ़ेगा और पूरे देश और राज्यों के विकास में तेज़ी आएगी।

इनके बुद्धिमान प्रधानमंत्री अपने निम्न वीडियो में इससे ठीक उलट कह रहे हैं:

अब यह नया ज्ञान आपको कब से मिला? राष्ट्रहित में यदि विपक्ष आपका सहयोग न करता तो कर लेते आप कार्य? खैर, इस सरकार की बुद्धिमानी के चर्चे दूर दूर तक हैं, एक बार मुख्यमंत्री जी ने ट्वीट किया कि हरयाणा में 10000 गाँव हैं; एक बार ट्वीट किया कि GT रोड पर उन्होंने 40-50 पुल बना दिये जबकि इतने पुल तो पूरे रोड पर नहीं. इनकी सरकार आने से पहले 6 से 8 पुल ही बाकी थे जो सुप्रीम कोर्ट के डंडे के बाद बने. अभी कुछ ही दिन पहले मुख्यमंत्री जी एक ऐसी आईटीआई के नाम को बदलने की घोषणा कर आये थे जो हरयाणा में है ही नहीं. कभी कहते हैं HUDA का नाम बदल दिया; फिर कहते हैं नहीं बदला. पीछे शिक्षा मंत्री पकिस्तान की सीमा में 250 किलोमीटर दूर तक सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए पाए गये थे तो एक प्रवक्ता ने तो पूरे हरयाणा में 40000 करोड़ सिंचाई पर लगा दिए थे जबकि समूचे हरयाणा का बजट एक लाख करोड़ के करीब है और खर्चा कुछ ही करोड़ था.

खैर, देखते हैं साहेब कब चेतेंगे; हिंदी की एक और कहावत याद आई; किस्मत महरबान तो गधा पहलवान. अब पहलवान जी पहलवानी तो दिखाएँगे ही; देखते हैं जनता कब तक झेलती है.