As Lawyer

एक वकील के रूप में मेरी जीवन यात्रा 2003 में जींद जिला न्यायालय से प्रारंभ हुई। वहां मेरे ताऊ चौधरी बलबीर सिंह ढुल के शिष्य के रूप में मैंने वकालत को जाना। 2004 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में जाना हुआ। वहां चौधरी हवा सिंह हुड्डा भूतपूर्व महाधिवक्ता हरियाणा के शिष्य के रूप में मैंने उच्च न्यायालय को जाना। बीच के 3 वर्ष को छोड़ मैं तब से इस कोर्ट में एवं आस पास के न्यायालयों में कार्य कर रहा हूँ। वकालत को एक पेशे के रूप में न मानते हुए मैंने इसे एक सामजिक सेवा के रूप में लिया है. अतः जब जब सम्भव होता है मैं प्रयास करता हूँ कि इससे आमजन की सहायता कर सकूं. 2004 से अब तक मैंने सिविल लॉ, क्रिमिनल लॉ, सर्विस लॉ, कम्पनी लॉ से लेकर इन्शुरेन्स लॉ तक के मामलों पर अपना कार्य किया है. लेकिन इस सब से दूर जनहित याचिकाओं पर कार्य करने में मुझे अत्यंत सुख का अनुभव होता है. एक जिम्मेदार नागरिक और अधिवक्ता होने के नाते जनहित के मुद्दों पर कार्य करना मेरे लिए सबसे बड़े गर्व का मुद्दा होता है. इस सबमें कोर्ट से प्रशंसा भी मिली है तो बहुत कुछ सुनने को भी मिला है. लेकिन एक विद्यार्थी की तरह मैं यह सीखता चल रहा हूँ.

जनहित की कुछ याचिकाएं:

  1. पानीपत जिले में मौजूद रहीमपुर खेडी गाँव जहाँ 2010 तक भी बिजली नहीं आई थी: इस मुद्दे को मैंने उठाया, हालांकि कोर्ट में रिलीफ अंततः नहीं मिल पाया क्योंकि कोर्ट की अपनी सीमायें हैं लेकिन मामला मीडिया में आने के बाद अंततः गाँव को बिजली दी जा रही है.
  2. चंडीगढ़ स्नेहालय से बच्चों के गायब होने का मुद्दा: स्नेहालय से लगातार बच्चों का गायब होना बहुत हैरानी का एवं चिंता का विषय था. इस मामले को उठाने के बाद प्रशासन ने कोर्ट की बनाई कमेटी की सिफारिशों पर वहां पर बहुत से सुधार किये हैं. इससे स्नेहल्यों के जीवनस्तर में बहुत सुधार आया है.
  3. वेटलैंड अर्थात आद्र्भूमि/दलदल की सफाई: पर्यावरण के अनुसार वेटलैंड पर्यावरण के बहुत महत्वपूर्ण भाग हैं. इनकी सफाई के दिशानिर्देश जारी होने के बावजूद भी सफाई का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ तो 2012 में मैंने याचिका डाली. सरकारों ने लिखित में जवाब दिया कि हम सफाई करेंगे. इस मुद्दे को जल्द दोबारा उठाऊँगा. हरिके, भिण्डावास, सुल्तानपुर आदि प्रमुख वेटलैंड हैं जिनके बारे में आप सबने सुना है.
  4. शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबन्धक कमिटी के आदेश के विरोध में याचिका: कमिटी ने अपने आदेश में कहा कि उसकी आज्ञा के बिना कोई भी गुरुद्वारा नहीं बनाया जायेगा. मैंने मामला कोर्ट में उठाया. अदालत ने कहा कि यदि किसी को ऐसी दिक्कत आये तो वह कोर्ट में अप्रोच करे. धर्म को मानने के मौलिक अधिकार के विरोध में कोर्ट सुनवाई करेगी. बाद में बहुत से लोग कोर्ट पंहुचे और उन्हें न्याय मिला.
  5. रोड सेफ्टी याचिका: हरियाणा में आम दृश्य है कि सडकों पर ठेकों पर अजीब अजीब बातें लिखी रहती हैं जैसे “ड्राइवरों के लिए विशेष छूट आदि. यह गलत है और गैरकानूनी है. कोर्ट ने आदेश दिया कि यदि ऐसा कुछ सच में है तो सरकार जांच करे और कार्यवाही की जाये.
  6. नेचुरोपैथी की प्रेक्टिस को रेगुलेट करने के लिए याचिका: केंद्र के आदेश के बावजूद भी नेचुरोपैथी की प्रेक्टिस को रेगुलेट करने के लिए हरियाणा या पंजाब में कोई कानून नहीं था. इससे नकली लोग इलाज के लिए आगे आ रहे थे. मेरी याचिका के बाद पंजाब ने कहा है कि वह कानून बना रहा है और हरियाणा ने कहा है कि बनाने की जरूरत नहीं. मामला पेंडिंग है और मुझे विश्वास है न्याय मिलेगा.
  7. Gender Determination Kits को रोकने के लिए याचिका