मोदी एप का सेलेक्टिव सर्वे, कहाँ तक सच्चाई के आस पास?

Rs 500 Notes

नोटबंदी पर विपक्ष के लगातार हंगामे के बाद भी संसद में न बोल कर प्रधानमन्त्री ने मोदी एप पर आम जनता से सर्वे माँगा है. प्रचारित किया गया है कि अब तक 90% लोग पक्ष में हैं. सबसे पहले हम उस एप में मौजूद प्रश्नों के ऊपर मेरे उत्तर देता हूँ:

मोदी जी का सवाल न 1-आपको लगता है हमारे देश में ब्लैक मनी है?

उत्तर: जी बेशक लगता है कि देश में काला धन है. लेकिन काले धन और काली मुद्रा में फर्क होता है. आधिकारिक अनुमानों के मुताबिक काली मुद्रा काले धन का बमुश्किल 3-4% है. विमुद्रीकरण से हम कुछ माह के लिए काली मुद्रा (नकली नोट और गैरकानूनी रूप से कमाई गयी करेंसी जो घर में रखी है) को रोक सकते हैं. न यह परमानेंट रुकेगी और न ही इसे दोबारा आने से रोक सकते. काला धन अपने आप में बहुत बड़ी कांसेप्ट है जिसमें प्रॉपर्टी, विदेशों में पड़ा धन, सोना, और जाने कहाँ कहाँ पड़ा सामान है. इस नाकाफी कदम से भविष्य में काला धन रखने वाले हमेशा के लिए सचेत कर दिए गये हैं. आगे ऐसे किसी कदम से सरकार को कोई आय होने की सम्भावना लगभग असंभव है. अतः यह रूटीन नहीं बन सकता.

मोदी जी का सवाल न.2-करप्शन काले धन के खिलाफ लड़ा जाना चाहिये?

उत्तर: क्यों नहीं? बेशक लड़ा जाना चाहिए; जनता आपके साथ है. इस ही कारण से जनता ने आपको मैंडेट दिया है. पर क्या मगरमच्छ को मारने के लिए मछली मारनी जरूरी हैं? मगरमच्छ जमीन पर भी रह सकते हैं पर मछली समाप्त! करप्शन से लड़ने के लिए सबसे पहले सरकार लोकपाल तो लगाये केंद्र में जिसको लगाने से दो साल से भाग रही है. गुजरात में तो सुप्रीमकोर्ट जाने के बाद कहीं जाकर लगने दिया था आपने लोकपाल; संदिग्ध व्यक्ति को आप CVC लगाते हैं फिर आप करप्शन से लड़ने की बात करते हैं? व्यापम का क्या किया, चिक्की घोटाले का क्या किया? लिस्ट बहुत लम्बी है; इस आर्टिकल में डाल नहीं पाऊंगा.

मोदी जी का सवाल न.3-काले धन के खिलाफ सरकार की कोशिशो पर क्या राय है?

उत्तर: कतई नाकाफी, स्पष्ट तौर पर पर समझें तो भ्रम फैलाने वाली है. 97% काले धन को छोड़ ३% के पीछे जाकर समस्त भारत में हाहाकार की स्थिति पैदा कर दी गयी है. इसे काफी नहीं कहेंगे! अधिक से अधिक ये पॉपुलिस्ट फैंसला है; इसका भी मैं विरोध नहीं कर रहा हूँ पर उत्तर तो देना बनता है कि क्या पाया और क्या खोया?

मोदी जी का सवाल न.4-करप्शन के खिलाफ कोशिशो पर आप क्या कहते है?

उत्तर: केंद्र में लोकपाल अभी तक नहीं लगा; आपकी नीति को स्पष्ट करने के लिये काफी है.

मोदी जी का सवाल न.5- नोटेबंदी पर सरकार के हालिया फैसले पर आप क्या सोचते है?

उत्तर: बढिया फैंसला जिसे घटिया तरीके से एक्सीक्यूट कर अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने का कार्य किया गया है.

मोदी जी का सवाल न.6-नोटबंदी से कालेधन करप्शन टेरर पर लगाम लगेगी?

उत्तर: कतई नहीं; दो माह के बाद फिर जीवित हो जायेगा सिस्टम. सेटबैक को परमानेंट न मानें. असली उपाय से आप खुद भाग रहे हैं. चुनाव सुधार किये? दोनों प्रमुख केन्द्रीय पार्टियों को छुपे हुए सोर्सेस से जो डोनेशन मिलती है उसे कब पब्लिक करेंगे? टेरर तो भूल ही जाओ; उनको एक जगह से पैसा नहीं मिलता. रूपये 2000 के नोट काहे आये?

मोदी जी का सवाल न.7-इससे उच्च शिक्षा, रियल स्टेट आम आदमी तक पहुंचेगा?

उत्तर: कैसे? रियल एस्टेट में अवश्य टेम्परेरी वृद्धि रुकेगी और कीमते कुछ माह तक कम रह सकती हैं लेकिन अन्य कोस्ट बढने के बाद ऐसा परमानेंट होगा यह मैं नहीं मान सकता.

मोदी जी का सवाल न.8-नोटबंदी की वजह से आपको कितनी असुविधा हुई?

उत्तर: कितनी गिनवाएं? 80 लोगों की 15 दिन में मृत्यू, चाय के बाग़ के मजदूर तड़प रहे हैं, मत्स्य इंडस्ट्री तबाही के कगार पर है, सब्जियां खत्म हो रही हैं, छोटे दुकानदार तंग हैं, मजदूरों को मजदूरी नहीं मिल रही. ऐसे बहुत से कार्य हो रहे हैं जो होने नहीं चाहियें.

मोदी जी का सवाल न.9-क्या भ्रष्टाचार विरोधी नेता अब भ्रष्टाचार के पक्ष में लड़ रहे है ?

उत्तर: जिस पार्टी के 282 लोकसभा के सांसदों में से 98 पर आपराधिक केस चल रहे हों, जिस पार्टी के अध्यक्ष पर हत्या जैसे संगीन आरोप हों, वह ऐसी बातें करते अच्छे नहीं लगते. जनता की समस्याओं को सरकार के सामने रखना भ्रष्टाचार नहीं हुआ करता; संवैधानिक जिम्मेदारी हुआ करती है.

मोदी जी का सवाल न.10-क्या आप PM को कोई सुझाव देना चाहते हैं?

उत्तर:  चुनाव करवा लो; बाकि आपने माननी नहीं. धक्के खा कर 15 दिन में 18 रोलबैक! ये सब समस्याएँ हमने समय रहते पंहुचा दी थी; सरकार नहीं मानी; धक्के खा कर मानी. अब क्या कहें आपको? बस इतना बता दो अधिक 100 के नोट छापने से किसने रोका था?

अब आपके सर्वे के बारे में बात कर लें. भारत में 60% से अधिक जनसंख्या लगभग अनपढ़ है(लिट्रेसी का मतलब केवल हस्ताक्षर करना नहीं होता); 70% से अधिक जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है. 40% जनसंख्या BPL है; बात स्पष्ट है; आपका सर्वे एक बहुत छोटे सेक्शन तक पंहुचा है; उस सेक्शन में भी बड़ी संख्या में आपकी खुद की पार्टी के समर्थक, वर्कर है. कृपया जिलेवार सामने रखें कि कितने लोगों ने किस जिले में आपके समर्थन में बोला? भारत भी देखे कि क्या हो रहा है?

एक छोटा सा सर्वे आप सबके लिए छोड़ रहा हूँ: आप कृपया नीचे उत्तर दें ताकि हम देखें कि प्रधानमन्त्री का सर्वे कहाँ तक पंहुचा है?

प्रधानमन्त्री के सर्वे के अंदर कौन पार्टिसिपेट नहीं कर पाया?

  1. किसान और ग्रामीण जनसंख्या
  2. दैनिक भत्ते पर कार्य करने वाले मजदूर 
  3. BPL परिवार 
  4. निजी सेक्टर में काम करने वाले नागरिक और शहरी पोपुलेशन

[dyamar_poll id=”2″]