सुनिए मुख्यमंत्री जी!

haryana agriculture

दिनांक: 19.11.2017
माननीय मुख्यमंत्री,
हरियाणा सरकार.

विषय: हरियाणा की सम्प्रभुता एवं एकता को सम्भावित खतरे बारे
श्रीमान जी

मुझे अत्यंत दुःख एवं पीड़ा के साथ आपको यह पत्र लिखना पड़ रहा है कि एक बार फिर से हरियाणा की एकता एवं चरित्र खतरे में है लेकिन इस बार भी आपका मूक दर्शक होना मेरे मन में पीड़ा पैदा कर रहा है. ऐसा नहीं है कि यह पहली बार देख रहा हूँ; लेकिन यह विषय पूर्णतया गैर-राजनैतिक है अतः आपको किसी प्रकार की राजनीति में नहीं घेरना चाहता. मुख्यमंत्री जी जैसा कि आपको विदित है कि 26 नवम्बर 2017 को आपके अपने हरियाणा के दो जिलों जींद एवं रोहतक में कथित तौर पर तीन प्रोग्राम हो रहे हैं; शायद आपको इसकी जानकारी न हो; मैं दे देता हूँ. 26 नवम्बर को रोहतक में अखिल भारतीय जाट आरक्षण समिति के अध्यक्ष श्री यशपाल मलिक जी जाट सम्मान रैली कर रहे हैं; वहीं दूसरी ओर कुरुक्षेत्र से सांसद श्री राजकुमार सैनी जींद में रैली कर रहे हैं; वहीं एक भटके हुए युवक संदीप भारती ने जींद में राजकुमार सैनी की रैली न होने की घोषणा कर दी है. इस रैली के विरोध में जींद में जाटसमाज के लोगों को इकट्ठा करने के लिए संदीप पिछले दो माह से हरियाणा के गाँव गाँव में जाकर लोगों को इकट्ठा कर रहा है. जहाँ तक मुझे विदित है उसे युवाओं का समर्थन भी मिल रहा है. मुख्यमंत्री जी युवा देश का भविष्य होता है; उसे जिस प्रकार से भी ढाला जाये वो ढल जाता है. उसे श्रेष्ट करने के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है और बुरा करने के लिए भी. लेकिन दुर्भाग्य देखिये; यहाँ युवाओं को जात-पात में लगातार भडकाया जा रहा है; पर संवैधानिक संस्थाएं सो रही हैं. आपको मैं याद करा दूं कि भारत के संविधान की प्रस्तावना भारत को पंथनिरपेक्ष घोषित करती है. संविधान के भाग IV में राज्य के नीति निर्देशक तत्व दिए गये हैं. ये तत्व राज्य के लिए एक निर्देशक की तरह कार्य करते हैं जिन्हें मानना और जिनके लिए कार्य करना राज्य का संविधानिक दायित्व है. इनमें से एक महत्त्वपूर्ण निर्देश आर्टिकल 38 में दिया गया है. इसमें लिखा गया है कि राज्य आर्थिक, राजनैतिक एवं सामाजिक न्याय सुनिश्चित कर राज्य को प्रगति पथ पर लेकर जायेगा. मुख्यमंत्री जी क्या जातीय भेदभाव और द्वेष पैदा करने से आपकी सरकार सामाजिक न्याय सुनिश्चित कर पा रही है? सामाजिक न्याय की परिपाटी में श्री राजकुमार सैनी की जींद रैली को परमिशन ही नहीं मिलनी चाहिए थी क्योंकि यह सर्व विदित है कि यह रैली एक जाति विशेष के विरुद्ध जनता को भडकाने के लिए की गयी है. क्या आपको यह विदित नहीं है कि कुछ भटके हुए युवक राजकुमार सैनी की इस रैली के विरुद्ध जनमानस को भडकाते हुए घूम रहे हैं और 24 नवम्बर के बाद 26 नवम्बर के लिए उन्हें जींद आने के लिए प्रेरित कर रहे हैं. ऐसे में क्या आपने सुरक्षा इंतजाम पुख्ता कर लिए हैं? या सरकार का हमेशा की तरह शुरू में आँख मीचने का ही इरादा है. क्या आप जानते हैं कि किसी भी प्रकार की अनर्गल ब्यान बाजी अथवा छोटी मोटी घटना भी जींद के अंदर उस दिन दंगे भडकाने का कार्य कर सकती है? यदि दंगे हुए तो राज्य एक बार फिर से अपने दायित्व में असफल साबित होगा. इन दोनों अत्यंत भडकाऊ कार्यक्रमों से सम्भावित नुक्सान की आशंका से जींद की जनता को सुरक्षा देने के आपके क्या इंतजाम हैं? मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि श्री राजकुमार सैनी एक बार नहीं बार बार IPC की धारा 153A का अपराध कर चुके हैं लेकिन उनके खिलाफ मुकद्दमे दर्ज करना तो दूर आपकी पुलिस ने कभी ब्यान तक नहीं लिखा है. उनके समर्थक लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से समाज में जहर भरने का कार्य कर रहे हैं. कुछ ऐसा ही कार्य संदीप भारती के साथ लगे हुए लोगों का है. वे राजकुमार सैनी के विरुद्ध लोगों को भडकाने का कार्य कर रहे हैं. सही अथवा गलत लेकिन राजकुमार सैनी को भी दुर्भाग्य से समाज के बहुत से लोग अपना नेता मानते हैं; ऐसे में इन भटके हुए युवकों की यह कार्यवाही उन भटके हुए लोगों को ललकार रही है. मुख्यमंत्री जी क्या हरियाणा गुंडाराज के दम पर चल रहा है? सरकार का सामाजिक न्याय कहाँ गया? सामाजिक न्याय यह कहता था कि धारा 144 लगा कर श्री सैनी की जींद रैली भी न होने दी जाती एवं उसका विरोध करने वालों की भी रैली नहीं होने दी जाती. श्रीमान जी ऐसा ही कुछ रोहतक में हो रहा है. वहां ठीक 26 नवम्बर को रहबरे आजम सर छोटू राम के नाम पर एक संस्थान का भूमि पूजन रखा गया है जबकि रहबर की जयंती 24 नवम्बर को है न कि 26 को. जाट स्वाभिमान के रूप में इस रैली में लोगों को राजकुमार सैनी की जींद रैली के जवाब में अधिक से अधिक संख्या में पंहुचने का भी आह्वान किया गया है और दावा किया जा रहा है कि लाखों लोग वहां पंहुचेंगे. क्या जातीय द्वेष का उत्तर जातीय प्रोग्राम करके दिया जावेगा अथवा जातीय द्वेष फैलाने वालों के खिलाफ कार्यवाही करके? दिल्ली से रोहतक के रास्ते पर जगह जगह जींद और रोहतक रैली के पोस्टर एक साथ लगे हुए दिख रहे हैं और एक दूसरे का मूंह चिढा कर सामाजिक न्याय पर हंस रहे हैं. इस प्रोग्राम का रोहतक में व्यापक स्तर पर विरोध हो रहा है. सरपंच, जिला परिषद के मेम्बर, ब्लाक समिति के मेम्बर लगातार इस प्रोग्राम का विरोध कर रहे हैं एवं गाँव गाँव मीटिंग की जा रही है. लगातार पंचायतों पर पंचायतें हो रही हैं. ऐसे में प्रशासन का चुप्पी साधना मुझे बेहद तकलीफ दे रहा है. मुख्यमंत्री जी एक दूसरे को ललकारते और उत्तर देने का हिंसक संकल्प लेते ये सब लोग हरियाणा की एकता, अखंडता और सम्प्रभुता के लिए खतरा बन कर रह गये हैं. क्या आपकी सरकार सम्भावित खतरे का सामना करने के लिए तैयार है? क्या यह आवश्यक नहीं था कि हरियाणा की एकता को अक्षुण रखने के लिए आपकी सरकार को 26 नवम्बर को होने वाले सभी प्रोग्राम्स की परमिशन को केंसिल कर देनी चाहिए? आपको विदित होगा कि अगस्त 2017 में भी आपकी सरकार एक सम्भावित खतरे से अनजान थी अथवा जानबूझ कर अनजान बनी हुई थी. डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की पेशी पर पंचकुला में लाखों लोगों को एकत्रित होने दिया गया था. वहां मुझे हारकर कोर्ट का रूख करना पड़ा. उसके बाद क्या हुआ यह सर्व विदित है. ऐसे ही फरवरी 2016 में भी सरकारी मशीनरी के फेल होने से पहली बार हरियाणा में दंगे हुए थे. मैं आपको इस सम्भावित स्थिति से आपको पहले ही आगाह कर रहा हूँ. दंगे/मारपीट अथवा तोड़फोड़ के बाद होने वाले किसी भी जानमाल के नुक्सान और बढ़े जातीय द्वेष की पूर्ण नैतिक जिम्मेदारी आपको लेनी होगी. जातीय दंभ/गर्व के नाम पर दूसरी जातियों को गाली गलौच करने से रोकना और समाज के लिए हानिकारक किसी भी प्रोग्राम को रोकना आपकी जिम्मेदारी है ताकि हरियाणा की एकता को कोई खतरा न हो. आपसी प्रेम एवं भाईचारा बनाये रखना भी आपकी जिम्मेदारी है. हरियाणा हमेशा से एक रहा था, यह आगे भी एक रहेगा. इसकी एकता को बरकरार रखने की जिम्मेदारी आज आपके कंधों पर है और इसका वहन करने के अलावा आपके पास कोई अन्य रास्ता नहीं है.
मेरी आपसे प्रार्थना है कि 26 नवम्बर को होने वाले सभी प्रोग्राम्स की परमिशन को केंसिल कर सरकार एक सख्त संदेश दे कि सरकार संवैधानिक दायित्व पूरा करने के लिए सख्त से सख्त कदम उठाने से भी नहीं हिचकिचाएगी. राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के शब्दों के बाद मेरे इस पत्र को मैं समाप्त करता हूँ:
समर शेष है, पाप का दोषी नहीं केवल व्याघ्र,
जो तठस्त रहेंगे, समय लिखेगा उनके भी अपराध.

आपका शुभचिंतक,
रविन्द्र सिंह ढुल एडवोकेट
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय, चंडीगढ़
इस पत्र की एक प्रति निम्नलिखित को भी प्रेषित की जा रही है:
1. मुख्य सचिव, हरियाणा सरकार
2. गृह सचिव, हरियाणा सरकार
3. पुलिस महानिदेशक, हरियाणा पुलिस
4. उपायुक्त जींद
5. कमिश्नर रोहतक